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अल्ट्रा वायलेट किटाणुशोधन टॉवर: लेजर साइंस एंड टेक्नोलोजी सेंटर ने यूवी ब्लास्टर नामक अल्ट्रा वायलेट किटाणुशोधन टॉवर विकसित किया

अल्ट्रा वायलेट किटाणुशोधन टॉवर
अल्ट्रा वायलेट किटाणुशोधन टॉवर | Image By Google

अल्ट्रा वायलेट किटाणुशोधन टॉवर: भारत सरकार के साइंस और टेक्नोलोजी की ओर बढ़ते कदम नई दिल्ली स्थित लेजर साइंस एंड टेक्नोलोजी सेंटर (डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन की एक प्रयोगशाला) गुड़गांव में स्थित एक निजी फॉर्म के साथ यूवी ब्लास्टर नाम से एक अल्ट्रा वायलेट किटाणुशोधन टॉवर विकसित किया है।

इस डिफेंस रिसर्च से भारत को एक नई अल्ट्रा वायलेट किटाणु शोधन के लिए प्राप्त हुआ है।




अल्ट्रा वायलेट किटाणुशोधन टॉवर



मुख्य बिन्दु

डिफेंस रिसर्च के इस उपकरण का उपयोग प्रयोगशालाओ में इलेक्ट्रानिक उपकरण कंप्यूटर और अन्य गैजेट्स के किटाणुशोधन के लिए किया जाता है।

जिन्हें सीधे तौर पर रासायनिक तरीकों से किटाणुरहित नहीं किया जा सकता है।

इन्हें उन स्थानों पर भी स्थापित कर सकते है।

जहां बड़े-बड़े मॉल, होटल और कार्यालयों सहित बड़ी संख्या में लोग इकठ्ठा होते है।

इस रिसर्च के द्वारा भारत सरकार ऐसे स्थानों पर ज्यादा ध्यान देगी।

जहां पर अधिक बीड़ भाड़ रहती है।

ऐसी कुछ स्थानों में पार्क भी आते है। जहां लोग एक साथ इकठ्ठा होकर पहुँचते है।

ऐसी जगह पर भी सरकार द्वारा ध्यान दिया जायेगा।



रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (DRDO)

भारत में रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (DRDO) की स्थापना 1958 में की गयी थी तथा इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

DRDO का आदर्श वाक्य “बलस्य मूलां विज्ञान” है।

वर्तमान समय में DRDO में 30,000 से अधिक कर्मचारी कार्य करते है।

अभी इस समय DRDO के चेयरमैन डॉ. सतीश रेड्डी है।

DRDO का का नियंत्रण भारत सरकार के केंद्रीय रक्षा मंत्रालय के पास होता है।

DRDO के पास पूरे देश भर में 52 प्रयोगशालाओ का नेटवर्क है।

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Author Since: Jan 05, 2019

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